योगिनी दशा फल (ज्योतिष शास्त्र) – सम्पूर्ण फलादेश
योगिनी दशा वैदिक ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण दशा पद्धति है, जिसका वर्णन ज्योतिष सार शिरोमणि आदि ग्रन्थों में मिलता है। इस लेख में योगिनी दशा के सभी भेद – मङ्गला, पिंगला, धान्या, भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा और संकट – के मूल संस्कृत श्लोक यथावत रखते हुए उनके हिंदी अर्थ प्रस्तुत किए गए हैं।
यह लेख ज्योतिष छात्रों, शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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मंगलादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
अरिणां विवदनं विनाशनं, वाहनस्य वहुरत्न लाभदा ।
कामिनीसुतगृहाद्विलासदा, मङ्गला सकल मङ्गलोदया ॥१॥
हिंदी अर्थ
मंगल योगिनी दशा में शत्रुओं के साथ होने वाले विवादों का नाश होता है। वाहन, आभूषण तथा बहुमूल्य रत्नों की प्राप्ति होती है। स्त्री, पुत्र और गृह संबंधी सुख-विलास प्राप्त होते हैं। यह दशा सर्व प्रकार से मंगलकारी और उन्नति देने वाली होती है।
पिंगलादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
दुःख-शोक-कुलरोग-वृद्धिता, व्यग्रता च कलहः स्वजनैश्च ।
अन्त्यभाग फलदा कथिताऽसौ, पिंगलाच विदुषां सुखदाऽऽदौ ॥२॥
हिंदी अर्थ
पिंगला योगिनी दशा में दुःख, शोक, कुलगत रोगों की वृद्धि, मानसिक व्यग्रता तथा स्वजनों से कलह होता है। इस दशा का प्रारम्भ विद्वानों के लिए सुखद होता है, परन्तु अंतिम भाग में कष्टदायक फल प्रदान करती है।
धान्यादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
धनंधान्यवृद्धि धरानाथमान्यं, सदा युद्धभूमौ जयं धैर्यवन्तम् ।
कलत्राङ्गनानां सुखं चित्रवस्त्रैर्युतं धान्यका धातुवृद्धिं करोति ॥३॥
हिंदी अर्थ
धान्या योगिनी दशा में धन और अन्न की वृद्धि होती है। राजा अथवा उच्च अधिकारियों से सम्मान प्राप्त होता है। युद्ध अथवा प्रतिस्पर्धा में विजय, धैर्य की वृद्धि, स्त्री-सुख, सुंदर एवं चित्र-विचित्र वस्त्रों की प्राप्ति तथा धातुओं (स्वर्ण आदि) की वृद्धि होती है।
भ्रामरीदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
विदेशे भ्रमं हानिमुद्वेगता च, कलत्राङ्गपीडा सुखवंजितं च ।
ऋणं व्याधिवृद्धिं तथा भूपकोपं, वशाभ्रामरी भोगभङ्गः करोति ॥४॥
हिंदी अर्थ
भ्रामरी योगिनी दशा में विदेश भ्रमण के कारण हानि, मानसिक उद्वेग तथा स्त्री को कष्ट होता है। सुखों का अभाव रहता है। ऋण की वृद्धि, रोगों में बढ़ोतरी तथा शासक अथवा सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। यह दशा भोगों में बाधा उत्पन्न करती है।
भद्रिकादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
धनानांविवृद्धिं गुणानां प्रकाशं, समीचीनवस्त्रागमं राजमानम् ।
अलंकार दिव्याङ्गनाभोग सौख्यं, दशाभद्रिका भद्रकार्यं करोति ॥५॥
हिंदी अर्थ
भद्रिका योगिनी दशा में धन की वृद्धि, गुणों का प्रकाश, उत्तम वस्त्रों की प्राप्ति और राजकीय सम्मान मिलता है। आभूषणों से सुसज्जित सुंदर स्त्री का सुख तथा विभिन्न शुभ और कल्याणकारी कार्य संपन्न होते हैं।
उल्कादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
जनानां विवादं, ज्वराणां प्रकोपं, धनादिष्टदारादिकानां वियोगम् ।
स्वगोत्रे विवादं, सुहृद्वन्धुवैरं, दशा चोल्किकाऽनर्थकर्ती सदैव ॥६॥
हिंदी अर्थ
उल्का योगिनी दशा में लोगों के साथ विवाद, ज्वर एवं रोगों का प्रकोप, धन, प्रिय वस्तुओं और पत्नी से वियोग होता है। अपने ही गोत्र में विवाद, मित्रों और संबंधियों से वैरभाव उत्पन्न होता है। यह दशा सदैव अनर्थकारी मानी गई है।
सिद्धादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
राज्ञोऽधिकारं स्वजनादि सौख्यम्, धनावदि लाभं गुणकीर्ति सिद्धिम् ।
वामादिलाभं सुतवृद्धिसौख्यम्, विद्यां च सिद्धा प्रकरोति पुंसाम् ॥७॥
हिंदी अर्थ
सिद्धा योगिनी दशा में राजकीय कार्यों में अधिकार प्राप्त होता है। स्वजनों से सुख, धन आदि का लाभ, गुण और कीर्ति की सिद्धि होती है। स्त्री-लाभ, संतान की वृद्धि से सुख तथा विद्या में सफलता प्राप्त होती है।
संकटादशाफलम्
संस्कृत श्लोक
जनानां विवादं ज्वराणां प्रकोपं, कलवादिकष्टं पशूनां विनाशं ।
गृहे स्वल्पवासं प्रवासाभिलाषं, दशा सङ्कटा सङ्कटं राजपक्षात् ॥८॥
हिंदी अर्थ
संकटा योगिनी दशा में स्वजनों के साथ विवाद, ज्वर एवं रोगों का प्रकोप, स्त्रियों को कष्ट तथा पशुओं की हानि होती है। घर में अल्प निवास, बार-बार प्रवास की इच्छा तथा राजपक्ष (सरकारी पक्ष) से संकट उत्पन्न होता है।
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