द्वादशदिव्य सूरी और दस पूर्वाचार्य
द्वादश दिव्य सूरी और दस पूर्वाचार्यों के नाम और विवरण। श्रीरामानुजाचार्य के प्रमुख शिष्यों और आलवारों की नामावली।

अष्टाविंशति अध्याय में श्रीरामानुज के शिष्यों के अलौकिक गुण, भक्ताग्रणी कूरेश की महिमा, अनन्ताचार्य और उनके शिष्यगण की भक्ति और सेवा का विस्तृत वर्णन।
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श्रीरामानुजाचार्य के शिष्य यतिराज यादवाद्रि से श्रीरंगम के लिए प्रस्थान करने पर मार्ग में बनाल में कुछ दिनों तक ठहरे। यह स्थान वर्तमान में मदुरै के पास है। वहाँ उन्होंने भगवान सुंदरबाहु की सेवा की। आण्डाल ने अपने रचित स्तव में भगवान से प्रार्थना की थी: "कुरुषे यादमां देव, पाणिग्रहण मंगलम्। क्षीराद्यनेक संयुक्त गुडान्नस्य घटान् शतम्। समर्पये हरे तुभ्यं नवनीत घटान् शतम्।" भगवान ने इस प्रार्थना को पूर्ण किया और श्रीरामानुज ने सौ घड़े गुड़ान्न और सौ घड़े मक्खन उनके माध्यम से समर्पित किए। यतिराज ने आण्डाल की जन्मभूमि का दर्शन किया और वहाँ प्रेमपूर्वक उनकी पूजा की।
दो वर्ष बाद कूरेश वृद्ध हो गए। वे यतिराज के सामने भगवत् गुणानुवाद सुनते हुए श्रीगुरु की पादुकाएँ हृदय में धारण कर मृत्युलोक में चले गए। यतिराज ने उन्हें श्रद्धापूर्वक सम्मानित किया और उनके पुत्र पराशर को सिंहासन पर उपवेशित कर वैष्णवों से आशीर्वाद लेने के लिए कहा। कूरेश का पवित्र शरीर कावेरी तट पर जलाया गया और संकीर्तन महोत्सव आयोजित किया गया।
श्रीरामानुजाचार्य के शिष्य अनन्ताचार्य ने स्त्री के साथ श्री शैल पर वास करते हुए भक्तों की सेवा की। उन्होंने वहाँ रहने वाले भक्तों के लिए तालाब खोदना प्रारम्भ किया, जिसे आज भी अनन्तसरोवर कहा जाता है। भगवान ने स्वयं स्त्री रूप धारण कर उनकी सहायता की, जिससे अनन्ताचार्य और उनकी पत्नी अत्यंत प्रसन्न हुए।
एक समय एक ब्राह्मण यतिराज के समीप आकर कैंकर्य द्वारा अपनी आत्मा को पवित्र करना चाहता था। श्रीरामानुज ने उसे अपने मठ में रहकर वैष्णव चरणोदक द्वारा पूजा करने का मार्ग बताया। ब्राह्मण ने यथासम्भव सेवा की और यतिराज ने प्रतिदिन उसके चरणोदक से पूजा की। इससे सभी शिष्य और भक्तों को भी लाभ और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
अष्टाविंशति अध्याय में शिष्यगण के गुणों का विस्तार मिलता है:
यह अध्याय हमें सिखाता है कि भक्ति केवल पूजा-आराधना नहीं, बल्कि सेवा, ज्ञान, उदारता और शिष्यगण के गुणों के माध्यम से भी प्रकट होती है।
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द्वादश दिव्य सूरी और दस पूर्वाचार्यों के नाम और विवरण। श्रीरामानुजाचार्य के प्रमुख शिष्यों और आलवारों की नामावली।
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