त्रयोविंश अध्याय – धनुर्दास | श्रीरामानुजाचार्य जीवन कथा
धनुर्दास और उनकी पत्नी हेमाम्बा की भक्ति, श्रीरामानुजाचार्य की कृपा, गरुड़-महोत्सव में घटनाएँ, गुण और ब्राह्मण धर्म का महत्व।
द्वादश दिव्य सूरी और दस पूर्वाचार्यों के नाम और विवरण। श्रीरामानुजाचार्य के प्रमुख शिष्यों और आलवारों की नामावली।
(प्रपन्नामृत के ७४ वें अध्याय से संकलित)
नाथार्य पंकजाक्षाश्च राम मिश्रश्च यामुनः । गोष्ठीपूणों महापूणर्णो मालाधार गुरुस्तथा । भूरिश्री शैलपूर्णश्च वररंगस्तथैव च । काँचीपूर्णदयश्चैते पूर्वाचार्याः प्रकीर्तिताः ॥
इसी प्रकार द्वादश दिव्य सूरी भी हैं। उनके नाम ये हैं :-
कासरभूत महदाह्वय भक्तिसारान् सेवे शठारि कुल शंखर विष्णुचित्तान् भक्तांघ्रि रेणु मुनिवाह चतुष्कविन्द्रान् माधुर्यगान् तुलसी वनजा मतीक्रान् ॥
द्वादस आलवारों के नाम श्री पराशर भट्ट ने एक श्लोक में इस प्रकार दिए हैं :-
भूतं सरश्च महदाह्वय भट्टनार्थः श्री भक्तिसारकुल शेखर योगिवाहान् । भक्ताँघ्रिरेणु परकाल यतीन्द्र मिश्रान् श्रीमत्परांकुश मुनि प्रणतोस्मि नित्यम् ॥
श्री रामानुज स्वामी की गणना आचार्य और आलवार दोनों में है।
विष्णुचित्त स्वामी को गोदाम्बा तुलसी के छोटे उद्यान में मिली थीं, इसीलिए उन्हें 'तुलसी बनजा' कहा गया। महाराज श्री जनक जी की जैसी जानको अयोनिजा पुत्री हैं, वैसे ही श्री विष्णुचित्त स्वामी की गोदाम्बा भो अयोनिजा है।
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धनुर्दास और उनकी पत्नी हेमाम्बा की भक्ति, श्रीरामानुजाचार्य की कृपा, गरुड़-महोत्सव में घटनाएँ, गुण और ब्राह्मण धर्म का महत्व।
विशिष्टाद्वैत वेदांत के अनुसार जीव, प्रकृति और परब्रह्म के स्वरूप, कारण और परिणाम, जीवों का तिरोहित स्वरूप, तथा मोक्ष और भक्ति का मार्ग।
श्रीरामानुजाचार्य द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थों का परिचय एवं विवरण। वेदार्थ संग्रह, वेदान्तसार, वेदान्त दीप, श्रीभाष्य, गीता भाष्य, गद्यत्रय, नित्याराधन।
